हम समझने, भेद करने और चुनाव करने के लिए बुलाये गये हैं, संत पापा | तस्वीरें

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संत पापा फ्राँसिस ने कुस्तुनतुनिया के प्राधिधर्माध्यक्ष बार्थोलोम की ख्रीस्तीय एकतावर्धक वार्ता के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। उन्होंने महामारी के बाद वैश्विक एकता और युखरीस्तीय भोज के महत्ता के बारे में बातें की।

माग्रेट सुनीता मिंज- वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार 28 जून 2021 (रेई) : सोमवार को वाटिकन में प्राधिधर्माध्यक्ष बार्थोलोम के ख्रीस्तीय एकता वर्धक वार्ता के प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए, संत पापा फ्राँसिस ने कहा कि संत पेत्रुस और पौलुस के पर्वों के लिए „रोम की कलीसिया और कॉन्स्टेंटिनोपल के बीच प्रतिनिधिमंडलों का यह वार्षिक आदान-प्रदान“ एकता का संकेत है। यद्यपि वास्तविक एकता अभी पूर्ण नहीं हई है – जिसे हम पहले ही साझा कर चुके हैं।“

संकट की घड़ी में पर्व मनाना

संत पापा ने कहा कि इस वर्ष हमारे संबंधित संतों का उत्सव „महामारी के कारण हुए संकट से उभरने के लिए संघर्ष कर रहे समय में आता है। संत पापा ने कहा कि इस संकट से अधिक गंभीर केवल एक चीज है „और वह है कि इस संकट से हमें सबक सीखना चाहिए। यह विनम्रता का एक सबक है, संत पापा ने आगे कहा, जो हमें दिखाता है कि „एक अस्वस्थ दुनिया में स्वस्थ जीवन जीना संभव नहीं है, या हम जैसे थे, बिना यह जाने कि क्या गलत हुआ।“।

ख्रीस्तियों के लिए संदेश

संत पापा ने फिर पूछा कि ख्रीस्तियों के लिए इसका क्या अर्थ है। संत पापा ने कहा, „हम भी इस बात पर गंभीरता से विचार करने के लिए बुलाये गये हैं कि क्या हम वही करना चाहते हैं जो हमने पहले किया था।“ क्या हमें ऐसा कार्य करना चाहिए जैसे कि कुछ हुआ ही नहीं, या „संकट की चुनौती को स्वीकार करें।“ संकट, जैसा कि शब्द के मूल अर्थ से पता चलता है, हमेशा एक निर्णय लेने का अर्थ होता है, अच्छे और बुरे के बीच का अंतर। संत पापा ने कहा, „वर्तमान संकट में हम जो कुछ भी करते हैं, जो स्थायी है और जो बीत रहा है, के बीच अंतर करने, समझने और चुनाव करने के लिए कहता है।“

संत पापा ने कहा कि हम ख्रीस्तियों के लिए पूर्ण सहभागिता के मार्ग पर जाने का अर्थ है „खुद से पूछना कि हम कैसे आगे बढ़ना चाहते हैं“, उन्होंने समझाया कि हर संकट एक चौराहे का प्रतिनिधित्व करता है जिस पर हम या तो „अपनी सुरक्षा और सुविधा की तलाश में खुद को वापस ले सकते हैं,“ या जिस पर „हम दूसरों के लिए खुले हो सकते हैं, जिसमें जोखिम भी शामिल है, जिसमें हमारे लिए ईश्वर की कृपा का भी वादा किया जाता है। संत पापा ने पूछा, „उदार और सच्ची बातचीत के माध्यम से हल किए जाने वाले मतभेदों की अनदेखी करते हुए, क्या हम अपनी कलीसियाओं के बीच संबंधों के एक नए चरण की शुरुआत नहीं कर सकते, जो एक साथ अधिक निकटता से चलने, आगे बढ़ाने की इच्छा, वास्तव में जिम्मेदार बनने  के साथ और अधिक इच्छुक होकर एक दूसरे के लिए हो?“ उन्होंने समझाया कि „यदि हम प्रेम के प्रति विनम्र हैं, पवित्र आत्मा के प्रति, जो ईश्वर का रचनात्मक प्रेम है और जो विविधता में सद्भाव लाता है, तो वह एक नए भाईचारे का मार्ग खोलेगा।“

अंत में, संत पापा फ्राँसिस ने उपस्थित सभी लोगों को धन्यवाद दिया और कहा कि वे प्राधिधर्माध्यक्ष बार्थोलोम, जो रोम की यात्रा करने में असमर्थ है,  उनको मेरा सौहार्दपूर्ण और सम्मानजनक अभिवादन: „संत पेत्रुस और संत पौतुस, प्रेरितों के राजकुमारों और संतों की मध्यस्ता से संत अंद्रेयस, सबसे पहले बुलाए गए, सर्वशक्तिमान ईश्वर अपनी दया से हमें आशीर्वाद दें और हमें अपनी एकता के और करीब ले जाएं।“

प्रतिनिधिमंडलों का पारंपरिक आदान-प्रदान

वाटिकन प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि 29 जून को रोम में संत पेत्रुस और संत पौलुस के उत्सव पर और 30 नवंबर को इस्तांबुल में संत अंद्रेयस संरक्षक संतों के पर्वों के लिए प्रतिनिधिमंडल के पारंपरिक आदान-प्रदान के हिस्से स्वरूप  ख्रीस्तीय एकतावर्धक वार्ता के प्रतिनिधि रोम आये हुए हैं। कल के ख्रीस्तयाग समारोह में खलदेई प्रधिधर्माध्यक्ष इम्मानुएल के साथ ब्यूनस आयर्स के ग्रीक ऑर्थोडॉक्स मेट्रोपॉलिटन इओसिफ के डीकन बरनाबास ग्रिगोरियाडिस भी होंगे।

आज संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन में ख्रीस्तीय एकतावर्धक वार्ता के प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। बाद में उन्होंने ख्रीस्तीय एकता को बढ़ावा देने के लिए परमधर्मपीठीय परिषद से मुलाकात की और औपचारिक बातों का आदान-प्रदान किया।

कल, मंगलवार 29 जून, वे संत पेत्रुस महागिरजाघर में संत पेत्रुस और संत पौलुस के पर्व दिवस अवसर पर  संत पापा फ्राँसिस की अध्यक्षता में होने वाले युखरीस्तीय बलिदान समारोह में भाग लेंगे।


स्रोत : vaticannews.va

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